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मोती खेती

मोती खेती में कम मेहनत और कम खर्च में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। अगर किसान मोती की खेती करता है तो पहले ट्रेनिंग अवश्य ले। अगर आप तालाब में खेती करते है तो मोती की खेती में बहुत ज्यादा लागत नहीं आती है। देश में हर साल चाइना और जापान से 100 करोड़ का मोती आता है इसीलिए ज़रूर मोती की खेती करनी चाहिए जिससे और देसो से मोती नही खरीदने पड़े।

मोती की खेती सीखने के ट्रेनिंग सेंटर

  • खेती करने से पहले ट्रेनिंग ले, बिना ट्रेनिंग के खेती नहीं कर सकते हैं।
  • धर्मनगरी चित्रकूट में कृषि विज्ञान केंद्र में मोती की खेती करना सिखाया जाता है।
  • इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च के तहत एक नए विंग सीफा यानि सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर मोती की खेती की निशुल्‍क ट्रेनिंग कराती है. इसका मुख्‍यालय भुवनेश्‍वर में है।
  • इण्डियन पर्ल फार्म एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट, अर्निया मंसूर पुर जंक्शन रोड खुरजा जिला बुलन्दशहर (उप्र) भारत

मोती की खेती में कमाई कितनी होती है

  • खेती शुरू करने के एक साल बाद एक सीप में सिर्फ एक मोती तैयार होता है। एक सीप में से एक मोती निकलता है एक मोती पर पूरा खर्चा निकलकर 200 रुपए बच जाते हैं। इतना फायदा किसी काम में नही होता है।

पानी की जांच कराए

  • शुरुआत में पानी की जांच कराए की इसमें जल का जीव रह सकता है या नहीं। पानी मीठा होना चाहिए।
  • पीएच मान सात से आठ होना चाहिए। तालाब का पानी महीनें में एक से दो बार बदलना चाहिए। उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए पानी में जैविक और अजैविक खाद डालते है। सीप का खानपान बहुत महंगा नहीं होता है।

खेती केसे करें

  • मोती की खेती कैसे करते हैं हम आपको शुरुआत से ही बताते हैं।

खेती के लिए टैंक केसे लगाए

  • 25 बाई 30 का टैंक बनाए, इतने बड़े टैंक में 8000 सीपो को रख सकते हैं। टैंक को चार फुट गहरा बनाए।
  • टैंक को एयर पंप के साथ और वेंतूरी पंप के साथ फिट करे। पंप के साथ फिट करके जगह छोटी छोटी नली लगादे, इनमे से पानी को 24 घंटे में सात घंटे जरूर चलाए जिससे सीपो को ऑक्सीजन मिलता रहता है।

सीपों को एक जगह किया जाता है

  • सबसे पहले सीपो को एक जगह किया जाता हैं। जिन क्षेत्रों की नदियों में सीप मिल जाती हैं वे वहां से निकलकर टैंक वाले स्थान पर ले जाया जाता हैं। जिन क्षेत्रों में सीप नहीं मिलती हैं वे लोग खरीद कर मोती की खेती करते हैं। एक सीप की कीमत 8 से 15 रुपए होती है।

इस्‍तेमाल से पहले की प्रक्रिया

  • सर्जरी करने से पहले 15 दिन तक पानी में रखा जाता है जिससे इसकी मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं और सर्जरी आसानी से हो जाती है।

सर्जरी

  • सर्जरी केसे की जाती हैं इसके बारे में ट्रेनिंग में बताया जाता है अगर कोई गलती हो जाती है तो सीप मर सकती है।
  • ट्रेनिंग में बताया जाता है कि इसको किस जगह से खोला जाता है वहा से सर्जिकल उपकरणों से खोलकर डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, अल्फाबेट ए टू जेड आदि के आकार वाले सीप के भीतर उसी जगह रखा जाता है जो ट्रेनिंग में बताया जाता है वर्ना तो मोती नही बनेगा। फिर सीप को बंद कर दिया जाता है।
  • सिपो को अंदर बीड चुबता है तो अन्दर से निकलने वाला पदार्थ बीड के ऊपर जमने लगता है जिससे एक साल में मोती तैयार हो जाता है।

सर्जरी के बाद सीपो को टैंक में केसे रखे

  • सीपो को नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बाँस या पीवीसी की पाइप से पानी से भरे टैंक में लटका दिया जाता है इन्हे टैंक के पेंदे से एक फिट ऊपर रखा जाता है।

मोती का उत्‍पादन

  • एक साल बाद सीपों को निकाल लिया जाता है। उनमें से मोती निकाल लिए जाते हैं।, मोती निकालते हैं तो सीप मर जाती है दोबारा खेती के लिए और सीप खरीदे जाते हैं। मरे हुए सीपो का उपयोग भी सजावटी सामान बनाने के लिए किया जाता है।

मोती की खेती से संबंधित जरूरी बाते

  • मोती की खेती करने से पहले ट्रेनिंग ले, ट्रेनिंग लिए बिना खेती नहीं करे।
  • खेती के लिए अच्छी किस्म के सीपो को खरीदे या जिन नदियों में मिलते वहा से इकट्ठा करे।
  • ट्रेनिंग बताया जाता हैं वैसे ही सीप की सर्जरी करे वर्ना सीप उसी समय मर जायेगी।
  • सीप की सर्जरी के बाद उनकी अच्छे से देखभाल करे ताकि उनके शरीर पर बनें घाव पर किसी प्रकार का इफैक्शन ना हो।
  • इसके बाद सीपों को पानी के टैंक या तालाबों रखा जाता है इस दौरान सीपों के खानपान, दवा आदि का ध्यान सही से रखे। अगर कोई सीप मर गए हैं तो उन्हें निकाल दे।
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